Him Beat News, शिमला/सोलन/मंडी| हिमाचल प्रदेश नगर निगम चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। सूबे के चार नगर निगमों (Municipal Corporations) के लिए हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीन पर जीत दर्ज कर सत्तारूढ़ कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। कांग्रेस केवल पालमपुर नगर निगम में ही अपनी साख बचाने में कामयाब रही, जबकि मंडी, धर्मशाला और सोलन में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये चुनावी नतीजे सुक्खू सरकार के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं।
सोलन और धर्मशाला में कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका

साल 2021 के नगर निगम चुनावों की तुलना में इस बार हिमाचल की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। 2021 में कांग्रेस ने सोलन, धर्मशाला और पालमपुर में जीत का परचम लहराया था, जबकि भाजपा केवल मंडी तक सिमट गई थी। लेकिन इस बार पासा पलट गया। सोलन, धर्मशाला और मंडी नगर निगम में भाजपा को बड़ी जीत मिली है। कांग्रेस केवल पालमपुर नगर निगम में जीत दर्ज कर सकी। विशेष रूप से सोलन और धर्मशाला को गंवाना कांग्रेस के लिए बड़ा डैमेज माना जा रहा है, क्योंकि ये दोनों क्षेत्र शहरी मतदाताओं के बदलते मूड और सरकार के प्रति उनकी नाराजगी को दर्शाते हैं।
CM सुक्खू का धुआंधार प्रचार भी नहीं आया काम
इस स्थानीय निकाय चुनाव (Local Body Elections) को कांग्रेस ने पूरी तरह प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था। खुद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चारों नगर निगम क्षेत्रों में धुआंधार चुनाव प्रचार किया था। मंडी में तो उन्होंने विकास कार्यों के लिए वार्डों को 50-50 लाख रुपये देने का बड़ा चुनावी वादा भी किया। इसके बावजूद जनता ने कांग्रेस को नकार दिया, जिससे अब विपक्ष (BJP) को सुक्खू सरकार की लोकप्रियता और नीतियों पर सीधे सवाल उठाने का बड़ा मौका मिल गया है।

मंत्रियों और संगठन की फौज रही फेल
कांग्रेस ने इन चुनावों को जीतने के लिए अपने दिग्गज मंत्रियों को मैदान में उतारा था। मंडी में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह प्रभारी थे। सोलन में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को कमान सौंपी गई थी। धर्मशाला में HPTDC के चेयरमैन आरएस बाली प्रभारी थे। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल की सक्रियता के बावजूद, संगठन मंत्रियों की प्रतिष्ठा को जीत में नहीं बदल सका।
पालमपुर ने बचाई कांग्रेस की लाज : बुटेल परिवार का चला जादू
चार नगर निगमों में से केवल पालमपुर ही कांग्रेस के लिए राहत की खबर लेकर आया। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यहां कांग्रेस की जीत का मुख्य श्रेय स्थानीय विधायक आशीष बुटेल और पूर्व विधायक बीबीएल बुटेल के मजबूत व्यक्तिगत जनाधार को जाता है। अगर पालमपुर भी हाथ से निकल जाता, तो इस चुनाव में कांग्रेस का सूपड़ा साफ होना तय था।
आमतौर पर स्थानीय निकाय या नगर निगम के चुनावों को सीधे हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव (Himachal Assembly Election 2027) का पैमाना नहीं माना जा सकता, क्योंकि दोनों के मुद्दे अलग होते हैं। हालांकि, यह जनता के मौजूदा असंतोष और राजनीतिक ट्रेंड का एक बड़ा इंडिकेटर जरूर है। इस हार के बाद अब कांग्रेस को सरकार और संगठन, दोनों ही स्तरों पर गंभीर आत्ममंथन करना होगा, वहीं हिमाचल बीजेपी नए जोश के साथ आगामी चुनावों की रणनीति में जुट गई है।









