Him Beat Bureau, शिमला | Himachal High Court ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के प्रमुख अभियंता नरेंद्र पाल सिंह को दिए गए छह माह के सेवा विस्तार को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने का आदेश दिया है। साथ ही सरकार को स्क्रीनिंग चयन समिति की रुकी प्रक्रिया दोबारा शुरू कर 11 नवंबर या उससे पहले पूरी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए जाते हैं, तो उन्हें 1 मई 2026 से पदोन्नति का लाभ दिया जाए।
सीएम ऑफिस के निर्देश पर चली फाइल, प्रक्रिया को बताया मनमाना
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मुख्य अभियंता नरेंद्र पाल सिंह चौहान की याचिका स्वीकार करते हुए सेवा विस्तार के फैसले पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि किसी एक अधिकारी को सेवानिवृत्ति के बाद पद पर बनाए रखने से छह से सात योग्य अधिकारियों की पदोन्नति प्रभावित हो सकती है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों के मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
खंडपीठ के अनुसार, सेवा विस्तार का प्रस्ताव नियमानुसार विभाग के निचले स्तर से आना चाहिए था, लेकिन इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर फाइल ऊपर से नीचे भेजी गई। अदालत ने इस प्रक्रिया को मनमाना और नियमों के विपरीत माना। अदालत ने यह भी कहा कि केवल जनहित का उल्लेख कर देने से कोई निर्णय जनहित में नहीं हो जाता। रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य या दस्तावेज नहीं मिला, जिससे साबित हो सके कि संबंधित अधिकारी को किन असाधारण परिस्थितियों में सेवा विस्तार दिया गया था।
पदोन्नति के लिए योग्य अधिकारी उपलब्ध थे
राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि विभाग में इस पद के लिए कोई उपयुक्त उत्तराधिकारी उपलब्ध नहीं था। हालांकि, अदालत के समक्ष यह बात सामने आई कि याचिकाकर्ता सहित तीन अन्य मुख्य अभियंता पदोन्नति के लिए योग्य थे। हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य सरकार ने 7 अप्रैल 2026 को लिखित निर्देश जारी कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सेवा विस्तार या पुनर्नियोजन नहीं देने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी को छह महीने का सेवा विस्तार दिया गया।
11 नवंबर तक चयन प्रक्रिया पूरी करने के आदेश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अप्रैल 2026 में रोकी गई स्क्रीनिंग चयन समिति की प्रक्रिया फिर से शुरू कर 11 नवंबर 2026 तक या उससे पहले पूरी करने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए जाते हैं, तो उन्हें 1 मई 2026 से पदोन्नति का लाभ, वरिष्ठता, वेतन निर्धारण और संबंधित वित्तीय बकाया दिए जाएं। अदालत ने पुराने न्यायिक फैसलों और हैंडबुक ऑफ पर्सनेल मैटर्स का हवाला देते हुए कहा कि सेवा विस्तार केवल अत्यंत दुर्लभ और असाधारण परिस्थितियों में जनहित को ध्यान में रखकर दिया जा सकता है। इसे राजनीतिक या व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर नहीं दिया जाना चाहिए।













