शिमला | Himachal High Court ने राज्य सरकार को अनुबंध से नियमित हुए कर्मचारियों की सेवाओं को वरिष्ठता, पदोन्नति, इन्क्रीमेंट और पेंशन लाभ के लिए गिनने के मामले में 28 नवंबर तक अंतिम फैसला लेने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सक्षम प्राधिकारी निर्धारित समयसीमा तक या उससे पहले 15 दिसंबर 2023 के मूल फैसले का हर हाल में अनुपालन सुनिश्चित करे। इस आदेश से प्रदेश के हजारों अनुबंध कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
15 दिसंबर 2023 को हाईकोर्ट ने दिया था आदेश
हाईकोर्ट ने यह निर्देश याचिकाकर्ता यशिका गुलेरिया की ओर से दायर अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए दिया। यशिका गुलेरिया और अन्य कर्मचारियों के मामले में अदालत ने 15 दिसंबर 2023 को आदेश दिया था कि उनकी अनुबंध अवधि की सेवाओं को वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों के लिए गिनने के दावे पर विचार किया जाए। हालांकि, अदालत के आदेश के बावजूद सरकार की ओर से इसका अनुपालन नहीं किया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने अदालत में अवमानना याचिका दायर की। अब हाईकोर्ट ने सरकार को निर्धारित समयसीमा के भीतर इस मामले में अंतिम निर्णय लेने और मूल आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
सेवा भर्ती एवं शर्तें अधिनियम 2024 का दिया था हवाला
इस मामले में शिक्षा विभाग ने हिमाचल प्रदेश सेवा भर्ती एवं शर्तें अधिनियम, 2024 का हवाला देते हुए कर्मचारियों के दावों को खारिज कर दिया था। इसी तरह के एक अन्य मामले, देवेंद्र कुमार बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार, में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई 2026 को राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी थी और आदेश लागू करने के लिए सरकार को चार महीने का समय दिया था। ऐसे में अब हाईकोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अनुबंध से नियमित हुए कर्मचारियों की सेवाओं को विभिन्न सेवा लाभों के लिए गिनने के मामले में सरकार के फैसले पर नजर रहेगी।













