एचबी ब्यूरो, शिमला | स्मार्ट मीटरिंग अभियान में बाधा डालने वाले उपभोक्ताओं पर अब बिजली बोर्ड सख्त कार्रवाई करेगा। बिजली बोर्ड प्रबंधन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि कोई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगाने से रोकता है, तो उसे मात्र 24 घंटे का लिखित नोटिस देकर बिजली की आपूर्ति काटी जा सकती है।
बिजली बोर्ड प्रबंधन ने शिमला, हमीरपुर, मंडी और कांगड़ा जोन के मुख्य अभियंताओं को कड़े आदेश भेजे हैं। बोर्ड ने साफ किया है कि स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरा होना चाहिए और इस कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फील्ड अधिकारियों को इस संबंध में विशेष अधिकार दिए गए हैं ताकि वे प्रक्रिया को सुचारू रूप से चला सकें।
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बिजली एक्ट 2003 के तहत होगी कार्रवाई
बिजली अधिनियम 2003 की धारा 163 का हवाला देते हुए बोर्ड ने बताया कि विभाग या उसके अधिकृत कर्मचारी को किसी भी परिसर में प्रवेश कर मीटर की जांच, मरम्मत या उसे बदलने का पूर्ण अधिकार है। अधिनियम के अनुसार, बिना प्रमाणित मीटर के बिजली आपूर्ति नहीं की जा सकती। यदि कोई उपभोक्ता इस प्रक्रिया में सहयोग नहीं करता है, तो विभाग उसे नोटिस जारी करेगा और 24 घंटे के भीतर सहयोग न मिलने पर कनेक्शन अस्थायी रूप से काट दिया जाएगा।
विभाग की संपत्ति हैं बिजली मीटर
अक्सर उपभोक्ताओं में यह भ्रम रहता है कि मीटर उनकी संपत्ति है, लेकिन बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा मीटर पूरी तरह से विभाग की संपत्ति होते हैं। केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (CEA) के नियमों के अनुसार, मीटर का स्वामित्व हमेशा वितरण कंपनी के पास ही रहता है, भले ही उपभोक्ता ने उसे स्वयं ही क्यों न खरीदा हो।
स्मार्ट मीटर के लाभ
- रियल टाइम डेटा: उपभोक्ताओं और विभाग को बिजली खपत की सटीक जानकारी मिलेगी।
- सटीक बिलिंग: गलत रीडिंग और बिलिंग से जुड़ी शिकायतों का समाधान होगा।
- चोरी पर नियंत्रण: बिजली चोरी रोकने में मदद मिलेगी और सिस्टम की कार्यक्षमता बढ़ेगी।
बिजली बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, स्मार्ट मीटरिंग से प्रदेश की बिजली व्यवस्था अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनेगी। बोर्ड ने सभी जोनल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन नियमों की जानकारी निचले स्तर तक पहुंचाई जाए और कार्य में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।








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