Chester Hills Solan : हाईकोर्ट का केंद्र और हिमाचल सरकार को नोटिस, CBI व ED से भी मांगा जवाब

Chester Hills Solan मामले पर हाईकोर्ट ने बड़ा एक्शन लिया है। कोर्ट ने केंद्र व हिमाचल सरकार, मुख्य सचिव, CBI और ED को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पूरी रिपोर्ट।

May 30, 2026 7:48 AM

Him Beat News, शिमला | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन के चर्चित रिहायशी प्रोजेक्ट चेस्टर हिल्स (Chester Hills Solan) में वित्तीय अनियमितताओं, बेनामी लेनदेन और धारा-118 के उल्लंघन के मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को हुई एक अहम सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार सहित देश की बड़ी जांच एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले में जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए देश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता, राज्य और केंद्र सरकार, डीजीपी (DGP) हिमाचल प्रदेश, पुलिस अधीक्षक (SP) शिमला और सोलन, प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई (CBI), आयकर विभाग (Income Tax), चेस्टर हिल्स के प्रमोटर व डेवलपर हंसराज, आदित्य सिंगला और अर्पित गर्ग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

संजय गुप्ता पर बेनामी लेनदेन के गंभीर आरोप

जनहित याचिका में राज्य के मुख्य सचिव संजय गुप्ता पर पद के दुरुपयोग और करोड़ों रुपये के बेनामी लेनदेन के बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिका के अनुसार जब नियमित राजस्व सचिव केके पंत अवकाश पर थे, तब संजय गुप्ता ने अस्थायी राजस्व सचिव का कार्यभार संभाला था। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसे आदेश पारित किए, जिससे चेस्टर हिल्स के प्रमोटरों को सीधा लाभ पहुंचा। हालांकि, बाद में राज्य सरकार ने इन आदेशों को वापस ले लिया था।

आरोप है कि इस लाभ के बदले संजय गुप्ता ने पंजाब के खरड़ में लगभग 3.15 हेक्टेयर जमीन खरीदी। इस जमीन की बाजार कीमत 75 से 125 करोड़ रुपये के बीच आंकी जा रही है। याचिका में दावा किया गया है कि संजय गुप्ता ने इस जमीन के लिए केवल 1 करोड़ 38 लाख रुपये का भुगतान दिखाया, और इस खरीद के लिए पूरी धनराशि चेस्टर हिल्स के प्रमोटरों की ओर से बेनामी तरीके से उपलब्ध करवाई गई थी।

यह पूरा विवाद सोलन के प्रीमियम हाउसिंग प्रोजेक्ट ‘चेस्टर हिल्स’ में बड़े पैमाने पर हुए वित्तीय नियमों के उल्लंघन, बेनामी संपत्ति की खरीद-फरोख्त और हिमाचल प्रदेश के सख्त ‘धारा-118’ (Land Laws) के नियमों को ताक पर रखने से जुड़ा है। अब देश की शीर्ष वित्तीय जांच एजेंसियां (ED और IT) इस बात की जांच करेंगी कि इस प्रोजेक्ट के पीछे मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी का कितना बड़ा खेल हुआ है।

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