Dehra Divorce Case : पत्नी की जिद और टैक्सी के खर्च ने तुड़वाया रिश्ता, अदालत ने सुनाया तलाक का फैसला

देहरा फैमिली कोर्ट ने वैवाहिक क्रूरता के आधार पर पति को तलाक की मंजूरी दी है। जानें कैसे पत्नी की बार-बार टैक्सी से मायके जाने की जिद, आर्थिक दबाव और आत्महत्या की धमकियों ने 'Dehra Divorce Case ' को जन्म दिया। आपसी समझ की कमी से टूटे इस रिश्ते की

April 21, 2026 3:33 PM

धर्मशाला। अक्सर कहा जाता है कि शादियां आपसी समझ और तालमेल से चलती हैं, लेकिन Dehra Divorce Case ने इस धारणा के उलट एक चौंकाने वाला उदाहरण पेश किया है। छोटी-छोटी जिद और आर्थिक बोझ किस तरह एक हंसते-खेलते घर को उजाड़ सकते हैं, यह मामला इसका जीवंत प्रमाण है। देहरा फैमिली कोर्ट ने इस विवाद पर सुनवाई करते हुए पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी कर दी है।

फरवरी 2022 में हुई थी शादी, दो महीने बाद ही विवाद शुरू

जानकारी के अनुसार, इस जोड़े का विवाह फरवरी 2022 में पंजाब के होशियारपुर में बड़े अरमानों के साथ संपन्न हुआ था। शादी के कुछ ही समय यानी दो महीने बाद पति-पत्नी के बीच मतभेद गहराने लगे। विवाद की मुख्य वजह पत्नी का बार-बार मायके जाने की जिद और आवाजाही के लिए महंगी टैक्सी की मांग करना बताया जा रहा है।

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आर्थिक तनाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोप

पति ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए बताया कि उसकी आय सीमित थी। पत्नी का हर बार टैक्सी से ही मायके जाने पर अड़ना आर्थिक रूप से उसके लिए संभव नहीं था। खर्चों को लेकर घर का माहौल अशांत रहने लगा। पति का आरोप है कि विवाद बढ़ने पर पत्नी उसे आत्महत्या की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थी। स्थिति इतनी बिगड़ी कि पत्नी ने वैवाहिक घर छोड़ दिया और लंबे समय तक मायके में ही रही।

पंचायत और समझौते की कोशिशें रहीं नाकाम

इस टूटते रिश्ते को बचाने के लिए सामाजिक स्तर पर भी प्रयास किए गए। देहरा में पंचायत के माध्यम से कई बार दोनों पक्षों को बिठाकर बातचीत कराई गई, लेकिन पत्नी की ओर से वैवाहिक संबंधों को सुधारने की कोई इच्छा नहीं दिखाई गई। अंततः, समाधान न मिलने पर पति ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

“विवाह केवल एक कानूनी बंधन नहीं है, बल्कि यह आपसी सम्मान और विश्वास की नींव पर टिका होता है। यदि ये आधार ही खत्म हो जाएं, तो रिश्ते को खींचना निरर्थक है।” – अदालत की टिप्पणी

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अदालत का फैसला : क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पत्नी लंबे समय से बिना किसी उचित कारण के पति से अलग रह रही थी। वह कोर्ट की कार्यवाही में भी शामिल नहीं हुई, जिसके कारण अदालत ने एकतरफा सुनवाई (Ex-parte hearing) का फैसला लिया। कोर्ट ने माना कि पति को मानसिक तनाव देना और बिना कारण घर छोड़ना ‘वैवाहिक क्रूरता’ की श्रेणी में आता है। इन तथ्यों के आधार पर देहरा फैमिली कोर्ट ने पति को तलाक की मंजूरी दे दी।

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