एचबी ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्वच्छता व्यवस्था पटरी से उतरने की कगार पर है। सैहब सोसायटी (SEHB Society) के करीब 800 कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। इस हड़ताल के कारण शहर के लगभग 60,000 घरों और व्यावसायिक संस्थानों से शुक्रवार को कूड़ा नहीं उठेगा।
वेतन बढ़ोतरी रोकने से कर्मचारियों में भारी रोष
हड़ताल का मुख्य कारण कर्मचारियों की सालाना 10 फीसदी वेतन बढ़ोतरी (Salary Increment) को रोकना है। कर्मचारी यूनियन ने नगर निगम प्रशासन के साथ हुई बैठक बेनतीजा रहने के बाद यह कड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को सभी कर्मचारी काम छोड़कर उपायुक्त (DC) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे। हड़ताल से पहले वीरवार को कर्मचारियों ने घर-घर जाकर पंफलेट बांटे और जनता को अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
प्रशासन ने लगाया एस्मा (ESMA), होगी सख्त कार्रवाई
शहर की सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने वीरवार शाम को आदेश जारी कर कर्मचारियों पर हिमाचल प्रदेश आवश्यक सेवा (एस्मा) अधिनियम 1973 लागू कर दिया है।एस्मा लागू होने के बाद यदि कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं, तो उनके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन का कहना है कि स्वच्छता सर्वेक्षण के बीच शहरवासियों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसलिए यह फैसला लिया गया है।
सफाई व्यवस्था ठप होने का खतरा
शिमला शहर की पूरी सफाई व्यवस्था सैहब कर्मचारियों के कंधों पर टिकी है। नगर निगम प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था का दावा किया है, लेकिन कूड़ा ढोने वाले चालकों ने भी हड़ताल का समर्थन कर दिया है। इससे कलेक्शन सेंटरों से भी कचरा उठना मुश्किल हो जाएगा। यूनियन अध्यक्ष जसवंत सिंह ने स्पष्ट किया है कि जब तक नगर निगम प्रशासन 10 फीसदी वेतन वृद्धि की मांग को पूरा नहीं करता, तब तक उनकी यह लड़ाई जारी रहेगी।







