एसबी ब्यूरो | शिमला
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में छह दिनों से जारी सैहब कर्मचारियों की हड़ताल पर नगर निगम ने कड़ा एक्शन लिया है। आपदा प्रबंधन और आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लागू होने के बावजूद काम पर न लौटने के आरोप में नगर निगम ने 37 सैहब कर्मचारी बर्खास्त कर दिए गए हैं। सेवाएं समाप्त किए गए कर्मचारियों में सैहब कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह, उपाध्यक्ष अमित भाटिया, मुख्य सलाहकार बालाराम और 34 वार्डों के सुपरवाइजर बताए जा रहे हैं। निगम आयुक्त ने बुधवार शाम बर्खास्तगी फाइल पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद सोसायटी में आउटसोर्स पर तैनात अन्य 300 कर्मियों की नौकरी पर भी संकट मंडरा रहा है।
शहर में कचरे के ढेर, नोटिस का भी नहीं हुआ असर
जिला दंडाधिकारी की ओर से एस्मा लागू कर हड़ताल को गैरकानूनी घोषित किए जाने के बाद नगर निगम ने कर्मचारियों को दो बार नोटिस जारी किए थे। इसके बावजूद कर्मी काम पर नहीं लौटे। पिछले छह दिनों से जारी इस हड़ताल के कारण शिमला शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। घरों से कूड़ा न उठने के कारण सड़कों के किनारे कचरे के ढेर लग गए हैं। निगम आयुक्त के मुताबिक, यूनियन पदाधिकारियों और वार्ड सुपरवाइजरों को बर्खास्त कर दिया गया है। इसके अलावा हड़ताल पर गए आउटसोर्स कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के लिए संबंधित ठेकेदार कंपनी को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
आज शिमला पहुंचेगी केंद्रीय सफाई आयोग की टीम
इस भारी तनाव के बीच, केंद्रीय सफाई आयोग की टीम आज (वीरवार) शिमला पहुंच रही है। शाम 4 बजे बचत भवन में सफाई कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी सैहब कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि वे आयोग के समक्ष अपनी मांगों को रखेंगे और शिमला में कर्मचारियों के साथ हो रहे व्यवहार की पूरी जानकारी देंगे।







