Him Beat News, शिमला | हिमाचल प्रदेश के नगर निकायों में चुनाव जीते पार्षदों के लिए राहत भरी खबर है। चुनाव खत्म होने के बाद भी पार्षदों को शपथ न दिलाए जाने के कारण शहरों में रुके पड़े विकास कार्यों के बीच अब राज्य सरकार ने इस मामले पर अदालत में अपनी स्थिति साफ कर दी है। बुधवार को Himachal High Court में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने इस पूरे मामले पर जवाब दाखिल किया। सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया है कि प्रदेश के सभी नगर निकायों में निर्वाचित पार्षदों को आगामी 7 जून या इससे पहले हर हाल में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिला दी जाएगी।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ के समक्ष सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से 23 मई को जारी की गई अधिसूचना भी प्रस्तुत की। सरकार ने माना कि नियमों के तहत चुनाव के 30 दिनों के भीतर पार्षदों को शपथ दिलाना अनिवार्य है, लेकिन इस बार प्रशासनिक मजबूरी के कारण इसमें देरी हुई। अदालत में दाखिल जवाब के मुताबिक, प्रदेश के सभी जिला उपायुक्त (DC) और उपमंडलाधिकारी (SDM) इस समय पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव संपन्न कराने में व्यस्त हैं। पंचायत चुनाव की यह प्रक्रिया 30 मई को समाप्त हो रही है, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनावी नतीजे 31 मई तक घोषित कर दिए जाएंगे। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि इस चुनावी प्रक्रिया के संपन्न होते ही 7 जून तक सभी निकायों में शपथ ग्रहण का काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर लिया जाएगा।
सरकार ने यह भी कहा कि 23 मई को अधिसूचना जारी होने के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका समाप्त हो चुकी है। अब ‘हिमाचल प्रदेश नगर पालिका चुनाव नियम, 2015’ के नियम 80 के तहत शपथ ग्रहण जैसी औपचारिकताएं पूरी करने की जिम्मेदारी सीधे राज्य सरकार की है।
कोर्ट रूम में दोनों पक्षों की दलीलें
याचिकाकर्ता का काउंटर तर्क: याचिकाकर्ता के वकील ने सरकार के इस तर्क का विरोध किया। उन्होंने कहा कि चुनाव की शेष बची प्रक्रिया और उसका आगामी कार्यक्रम तय करने का अधिकार सरकार के पास नहीं, बल्कि स्वतंत्र सांविधानिक संस्था राज्य निर्वाचन आयोग के पास है। इसलिए इस मामले में आयोग का पक्ष आना भी बेहद जरूरी है।
निर्वाचन आयोग की अनुपस्थिति पर कोर्ट का कड़ा रुख: सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं थे। इस पर खंडपीठ ने सख्त निर्देश दिया कि आयोग अगली सुनवाई में अपने वकील के माध्यम से आवश्यक निर्देश और जवाब उपलब्ध कराए, ताकि मामले में अंतिम निर्णय लिया जा सके। आयोग की अनुपस्थिति के कारण मामले की अगली सुनवाई 29 मई को निर्धारित की गई है।






