Shimla : हिमाचल में सरकारी नौकरी के लिए एंटी चिट्‌टा टेस्ट अनिवार्य; छात्रों की भी होगी ड्रग जांच

हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ सख्त कदम। सरकारी नौकरी पाने वालों और प्रोफेशनल कोर्स के छात्रों के लिए एंटी चिट्‌टा टेस्ट अनिवार्य। तस्करों की सूचना देने पर इनाम अब 20 हजार रुपये।

May 12, 2026 10:06 AM

एचबी ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश में चिट्टा (सिंथेटिक ड्रग्स) के बढ़ते कारोबार और युवाओं में फैलती नशे की लत को जड़ से खत्म करने के लिए सुक्खू सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया है। सोमवार को राज्य सचिवालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि अब प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने वाले हर अभ्यर्थी को नियुक्ति से पहले अनिवार्य रूप से ‘एंटी-चिट्टा टेस्ट’ (ड्रग स्क्रीनिंग) से गुजरना होगा।

नई व्यवस्था के तहत, अभ्यर्थी की ओर से भर्ती परीक्षा पास करने के बाद विभाग उसकी ड्रग स्क्रीनिंग करवाएगा। यदि रिपोर्ट में नशे की पुष्टि नहीं होती है, तभी उम्मीदवार को अंतिम नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कदम केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर स्तर पर नशे के प्रवेश को रोकने की एक बड़ी कोशिश है।

प्रोफेशनल कोर्स के छात्रों की भी होगी जांच

सरकार का यह अभियान केवल नौकरियों तक सीमित नहीं रहेगा। मेडिकल, इंजीनियरिंग, नर्सिंग और फार्मेसी जैसे प्रोफेशनल कोर्स करने वाले विद्यार्थियों की भी अब हर साल ड्रग स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों में एक नियमित तंत्र विकसित किया जाएगा। राहत की बात यह है कि टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने वाले छात्रों को सजा देने के बजाय सरकार उनके उपचार और पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करेगी।

अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी

नशे के खिलाफ अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अब जिला उपायुक्तों (DC) और पुलिस अधीक्षकों (SP) की जवाबदेही भी तय की गई है। अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में उनके जिले की ‘एंटी-ड्रग्स परफार्मेंस’ को शामिल किया जाएगा। तस्करों का नेटवर्क तोड़ने और जागरूकता बढ़ाने में उनकी क्या भूमिका रही, इसके आधार पर उनका मूल्यांकन होगा। सरकार ने प्रदेश की पंचायतों को नशे के प्रभाव के आधार पर रेड, येलो और ग्रीन जोन में बांटा है। रेड और येलो जोन वाली पंचायतों में सघन जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इसके अलावा, नशे के सौदागरों की सूचना देने वाले सजग नागरिकों के लिए इनामी राशि को 10 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दिया गया है। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।

दागी कर्मचारियों पर गिरेगी गाज

मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए बताया कि नशे के कारोबार में संलिप्त विभिन्न विभागों के करीब 90 कर्मचारियों को बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनमें से 31 कर्मचारियों को पहले ही बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है, जिनमें 21 पुलिसकर्मी शामिल हैं। शेष कर्मचारियों पर मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। प्रतिबंधित दवाओं के निर्माण में शामिल उद्योगों और केमिस्टों के खिलाफ भी सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने पर लाइसेंस तुरंत निरस्त किए जाएंगे। साथ ही, जमानत पर छूटकर दोबारा तस्करी करने वाले अपराधियों की अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करने का अभियान जारी रहेगा।

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