Him Beat Bureau, नाहन | हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों के आराध्य चालदा छत्रधारी महासू महाराज को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सिरमौर जिले के शिलाई उपमंडल के पश्मी गांव में विराजमान चालदा छत्रधारी महासू महाराज 3 दिसंबर को उत्तराखंड के मशक गांव के लिए प्रस्थान करेंगे। महाराज की इस भव्य विदाई यात्रा को लेकर पश्मी गांव में तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं। इस धार्मिक यात्रा में दोनों राज्यों से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
चालदा महासू महाराज की यात्रा और पड़ावों की रूपरेखा तैयार करने के लिए पश्मी गांव में छत्रीधारी चालदा महासू महाराज के वजीर दीवान सिंह की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इसमें महाराज की वापसी यात्रा का पूरा कार्यक्रम निर्धारित किया गया और रास्ते में पड़ने वाले विभिन्न पड़ावों पर रात्रि विश्राम को लेकर जरूरी निर्णय लिए गए। पश्मी स्थित महासू मंदिर के पुजारी के अनुसर, चालदा छत्रधारी महासू महाराज पिछले वर्ष दिसंबर में पश्मी गांव पधारे थे और अब वह यहां से वापस उत्तराखंड के लिए प्रस्थान कर रहे हैं।
ऐसा रहेगा महाराज का विदाई कार्यक्रम
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, चालदा महासू महाराज 3 दिसंबर को पश्मी गांव से प्रस्थान करने के बाद अपने पहले पड़ाव के तहत द्राबिल में रात्रि विश्राम करेंगे। इसके बाद यात्रा का आगे का सफर इस प्रकार रहेगा:
4 दिसंबर: उत्तराखंड के बायला भरम में रात्रि विश्राम
5 दिसंबर: तिलूर खेड़ा में रात्रि पड़ाव
6 दिसंबर: कांदोई भरम में रात्रि पड़ाव
यात्रा के पांचवें पड़ाव पर महाराज उत्तराखंड के मशक गांव पहुंचेंगे, जहां वह नवनिर्मित महासू मंदिर में प्रवेश करेंगे।
दोनों राज्यों के बीच अटूट आस्था का प्रतीक
यह विदाई यात्रा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों की गहरी धार्मिक आस्था और पारंपरिक आपसी संबंधों का अनूठा प्रतीक है। इस धार्मिक अनुष्ठान में हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री एवं शिलाई क्षेत्र के नौ गांव मस्तभोज के नंबरदार हर्षवर्धन चौहान के भी शामिल होने की बात कही गई है। महाराज के प्रस्थान के दौरान जगह-जगह श्रद्धालुओं के जुटने और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उन्हें विदाई देने की उम्मीद है। चालदा महासू महाराज 15 दिसंबर 2025 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पश्मी गांव पहुंचे थे।
उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र के दसऊ गांव से उनकी प्रवास यात्रा 8 दिसंबर 2025 को शुरू हुई थी। करीब 70 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के बाद महाराज 15 दिसंबर की सुबह लगभग 4 बजे पश्मी गांव के नवनिर्मित मंदिर में विधि-विधान से विराजमान हुए थे। यहां उनका करीब एक वर्ष तक प्रवास निर्धारित था। इससे पहले, वर्ष 2020 में चालदा महासू महाराज का देव प्रतीक माना जाने वाला बकरा (घांडुवा) पश्मी गांव पहुंचा था। वर्ष 2022 में देव वक्ता के माध्यम से इसे महाराज के आगमन का संकेत बताया गया था।












