एचबी ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी भर्तियों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई चयनित उम्मीदवार एक बार पदभार ग्रहण (Join) कर लेता है और उसके बाद इस्तीफा देता है, तो उस खाली पद को पुरानी चयन प्रक्रिया की वेटिंग लिस्ट (Waiting List) से नहीं भरा जा सकता।
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सरकारी नौकरियों में प्रतीक्षा सूची का अधिकार केवल तब तक सीमित है, जब तक चयनित उम्मीदवार पदभार ग्रहण नहीं करता। कोर्ट के अनुसार एक बार उम्मीदवार के ज्वाइन करने पर उस पद के लिए पुरानी चयन प्रक्रिया समाप्त मानी जाएगी। इस्तीफे से खाली हुआ पद ‘फ्रैश वैकेंसी’ (Fresh Vacancy) कहलाएगा। ऐसे पदों को केवल नए विज्ञापन और नई भर्ती प्रक्रिया के जरिए ही भरा जा सकता है।
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ADA भर्ती से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला सहायक जिला अटॉर्नी (ADA) की भर्ती से संबंधित था। हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा निकाली गई इस भर्ती में अनुसूचित जाति श्रेणी के एक चयनित उम्मीदवार ने ज्वाइनिंग के कुछ समय बाद इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद मेरिट सूची में दूसरे स्थान पर रही याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर मांग की थी कि वेटिंग लिस्ट में होने के कारण उन्हें नियुक्ति दी जाए। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को पूरी तरह से नकार दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अतीत में किसी विभाग ने नियमों की अनदेखी कर वेटिंग लिस्ट से ऐसी नियुक्तियां दी हैं, तो उसे कानूनी आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने साफ कहा कि भविष्य में गलत आदेशों को दोहराने के लिए “समानता के अधिकार” का हवाला नहीं दिया जा सकता।







