शिमला | सीबीआई अदालत ने जाली दस्तावेजों के आधार पर बैंक से करोड़ों रुपये के ऋण हासिल करने और विदेशी विनिमय बिलों की वसूली न होने से जुड़े बड़े वित्तीय घोटाले में कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने एक निजी कंपनी, केनरा बैंक के दो तत्कालीन अधिकारियों समेत कुल 11 दोषियों को चार-चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही सभी दोषियों पर कुल 19 लाख 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह पूरा मामला बद्दी स्थित केनरा बैंक शाखा से जुड़ा है, जहां आपराधिक साजिश के तहत बैंक को भारी वित्तीय क्षति पहुंचाई गई थी।
फर्जी दस्तावेजों से स्वीकृत किए गए थे करोड़ों के ऋण
सीबीआई की जांच के अनुसार, अक्टूबर 2008 से मार्च 2009 के बीच आरोपियों ने सोची-समझी साजिश के तहत मैसर्स कलर कैंप इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में जाली दस्तावेजों पर भारी-भरकम ऋण मंजूर करवाए। इनमें सात करोड़ रुपये का वर्किंग कैपिटल लोन और 91 लाख रुपये का टर्म लोन शामिल था, जिससे कुल 7.91 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए गए। इसके अलावा, बैंक ने कंपनी के 4.87 करोड़ रुपये के विदेशी विनिमय बिल डिस्काउंट किए थे, लेकिन संबंधित आयातकों से इस राशि की कोई वसूली नहीं हो पाई। इन संदिग्ध लेन-देन के कारण बैंक को करारा वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया फैसला
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में 8 मई 2012 को एफआईआर दर्ज की थी। लंबी जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद विशेष सीबीआई अदालत, शिमला ने 30 सितंबर 2026 को सभी 11 आरोपियों को दोषी करार दिया। इसके बाद अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को सजा का ऐलान करते हुए प्रत्येक दोषी को चार साल की कठोर कैद और जुर्माने की सजा सुनाई। सजा पाने वालों में मुख्य रूप से मैसर्स कलर कैंप इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, केनरा बैंक बद्दी शाखा के तत्कालीन चीफ मैनेजर डीएसएस रविंद्र, तत्कालीन अधिकारी सीएस वर्मा और अन्य निजी व्यक्ति जैसे राकेश नरूला, सोनल नरूला, संजीव बहल, हरभजन सिंह, सुखदेव सिंह, प्यारा सिंह, सुमन नरूला तथा सुनील कुमार गोयल शामिल हैं।












