Him Beat Bureau, सोलन | हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों में निर्मित दवाओं की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की ओर से जारी सितंबर के Drug Alert में देशभर की 330 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें हिमाचल प्रदेश के उद्योगों में निर्मित 93 दवाएं शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक 73 दवाएं सोलन जिले, 18 सिरमौर और दो ऊना जिले की कंपनियों में बनी हैं।
जांच में बुखार, एसिडिटी, दर्द, खांसी, सूखी खांसी, पेट के कीड़ों, खून की कमी, एलर्जी, संक्रमण, त्वचा संक्रमण, ब्लड प्रेशर, सूजन, मलेरिया और थायराइड सहित कई बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं पाए गए। राज्य के ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर के अनुसार, जिन कंपनियों की दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, उनके खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। संबंधित दवाओं का स्टॉक बाजार से वापस मंगवाया जाएगा। इसके अलावा, औषधि विभाग अपने स्तर पर भी इन दवाओं के सैंपलों की जांच करेगा।
इन जिलों के उद्योगों की दवाएं जांच में फेल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गुणवत्ता जांच में फेल दवाओं में सोलन जिले के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, झाड़माजरी और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की कंपनियों के उत्पाद शामिल हैं। सिरमौर जिले के पांवटा साहिब और कालाअंब के उद्योगों की दवाएं भी जांच में मानकों पर खरी नहीं उतरीं। ऊना जिले की दो दवाओं के सैंपल भी फेल हुए हैं। जांच में अलग-अलग कंपनियों की बुखार, दर्द, एसिडिटी, खांसी, एलर्जी, संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के सैंपल फेल पाए गए। इसके अलावा आयरन की दवा और अन्य उपचारों में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद भी गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। उपलब्ध सूची में पांवटा साहिब की लैबोरेट और कोपमेड, बद्दी की मार्क लैब, एलेक्सा, अल्ट्रा ड्रग, नेपच्यून और अन्य कंपनियों के नाम शामिल हैं। कालाअंब, बरोटीवाला, झाड़माजरी और नालागढ़ स्थित कई अन्य दवा इकाइयों के उत्पाद भी जांच में फेल बताए गए हैं।














