Census 2027 : हिमाचल में पहली बार डिजिटल तकनीक से होगी जनगणना, 1 जून से स्वगणना की सुविधा

Census 2027 Himachal Pradesh : हिमाचल में पहली बार डिजिटल तकनीक से होगी जनगणना। 1 जून से शुरू होगी घर बैठे ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा। जानें पूरा प्रोसेस।

May 23, 2026 1:13 AM

Him Beat News, शिमला | हिमाचल प्रदेश में इस बार होने जा रही जनगणना 2027 (Census 2027) की प्रक्रिया डिजिटल और हाईटेक होने जा रही है। इस अभियान में आम लोगों को खुद अपनी और अपने परिवार की गिनती करने का मौका मिलेगा। शिमला स्थित जनगणना कार्य निदेशालय के अनुसार, केंद्र सरकार जनगणना को पूरी तरह से आधुनिक, पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए तीन मुख्य डिजिटल स्तंभों का उपयोग कर रही है।

हिमाचल प्रदेश में 16 जून से शुरू होगा पहला चरण

हिमाचल प्रदेश में Census 2027 का प्रथम चरण, यानी मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक चलाया जाएगा। अभियान को गति देने और देश के हर नागरिक की सटीक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने इसे पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर दिया है। डिजिटल जनगणना के तहत आम जनता को एक सुरक्षित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपना विवरण दर्ज करने की सुविधा मिलेगी। हिमाचल प्रदेश में यह स्वगणना (Self-Enumeration) की सुविधा 1 जून से 15 जून 2026 तक उपलब्ध रहेगी। यह कदम न केवल नागरिकों का समय बचाएगा बल्कि डेटा की गोपनीयता और सटीकता को भी कई गुना बढ़ा देगा।

ऐसे काम करेगी 11 अंकों की स्वगणना ID

ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज करने के बाद नागरिकों को एक 11 अंकीय स्वगणना आईडी नंबर प्राप्त होगा। इसका उपयोग इस प्रकार होगा। जब 16 जून से 15 जुलाई 2026 के बीच जनगणना कर्मी आपके घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे, तो आपको उन्हें यह आईडी नंबर देना होगा। यह आईडी डालते ही पोर्टल पर आपकी ओर से भरी गई जानकारी सीधे कर्मी के मोबाइल एप में प्रदर्शित होगी, जिससे दोबारा फॉर्म भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

मोबाइल एप से लैस होंगे कर्मचारी, रियल-टाइम पर दर्ज होगा डेटा

फील्ड में तैनात जनगणना कर्मी इस बार कागजी फॉर्म लेकर नहीं, बल्कि एक अत्याधुनिक एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। इस एप के जरिए डेटा वास्तविक समय (Real-Time) में दर्ज होगा, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी। डिजिटल माध्यम से डेटा प्रोसेसिंग की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, लॉजिस्टिक्स, प्रोग्रेस ट्रैकिंग और अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए एक विशेष केंद्रीय पोर्टल तैयार किया गया है।

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