Him Beat News, शिमला | हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में हाल ही में की गई भारी फीस वृद्धि के विरोध में शुक्रवार को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की विश्वविद्यालय इकाई ने परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस HPU Fees Hike Protest में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों और अलग-अलग विभागों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए छात्र विरोधी फैसलों को तत्काल वापस लेने की मांग की।
एसएफआई (SFI) ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षा शुल्क, छात्रावास शुल्क, पुनर्मूल्यांकन शुल्क और मरम्मत शुल्क सहित कई अन्य शुल्कों में भारी बढ़ोतरी की गई है। इससे आम छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। यह फैसला गरीब, ग्रामीण, अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST), ओबीसी (OBC) और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की राह को बेहद कठिन बना देगा।

शिक्षा को व्यापारिक मॉडल में बदलने का आरोप
HPU Fees Hike Protest के दौरान छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए SFI के विश्वविद्यालय इकाई सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी प्रशासनिक विफलताओं और वित्तीय कुप्रबंधन का बोझ छात्रों पर डालने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, यदि विश्वविद्यालय आर्थिक संकट का हवाला देता है, तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि उपलब्ध संसाधनों और वित्तीय फंड का उपयोग किस प्रकार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन संसाधनों के उचित प्रबंधन और दीर्घकालिक वित्तीय योजना बनाने में पूरी तरह विफल रहा है। अब अपनी नाकामी की भरपाई करने के लिए छात्रों से अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है।

SFI ने किया कैग (CAG) रिपोर्ट का जिक्र
HPU Fees Hike Protest के दौरान एसएफआई ने हालिया कैग (CAG) रिपोर्ट का भी प्रमुखता से जिक्र किया। संगठन ने कहा कि रिपोर्ट में लगभग 186 शिक्षकों की नियुक्तियों और पदोन्नतियों में कथित अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। SFI ने तीखा सवाल उठाया कि यदि विश्वविद्यालय में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं हुई हैं, तो उनकी जवाबदेही तय करने के बजाय आम छात्रों पर फीस वृद्धि का बोझ क्यों डाला जा रहा है? विश्वविद्यालय प्रशासन को सबसे पहले वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
फीस वृद्धि वापस न होने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
SFI ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखते हुए स्पष्ट किया है कि परीक्षा शुल्क, हॉस्टल फीस, पुनर्मूल्यांकन शुल्क और मरम्मत शुल्क में की गई बढ़ोतरी तुरंत वापस ली जाए। विश्वविद्यालय के वित्तीय प्रबंधन और नियुक्तियों में हुई कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच करवाई जाए। संगठन ने दो टूक कहा कि अगर HPU Fees Hike Protest के बाद भी यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो विश्वविद्यालय स्तर से लेकर पूरे हिमाचल प्रदेश में उग्र राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।






