Him Beat News, शिमला | हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार को एक बड़ा झटका लगा है। अदालत ने स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (विजिलेंस ब्यूरो) को सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के दायरे से बाहर करने की राज्य सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार, विजिलेंस ब्यूरो और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले की अगली सुनवाई 24 जून 2026 को तय की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा कानूनी विवाद साल 2024 में विजिलेंस ब्यूरो में दर्ज भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेज जमा करने की एक एफआईआर (FIR) से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता ने इस मामले में 15 लोगों के नाम विजिलेंस को सौंपे थे, लेकिन विजिलेंस ने केवल 3 लोगों पर ही एक्शन लिया। इसके बाद, शिकायतकर्ता ने साल 2025 में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। अदालत के आदेश के बाद, याचिकाकर्ता ने विजिलेंस जांच के करंट स्टेटस की जानकारी लेने के लिए एक आरटीआई दाखिल की। 2 मई को मिले जवाब में विजिलेंस ने खुलासा किया कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने 12 मार्च 2026 को एक अधिसूचना जारी कर विजिलेंस ब्यूरो को आरटीआई के दायरे से पूरी तरह बाहर कर दिया है।
सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती
विजिलेंस के इस चौंकाने वाले जवाब के बाद याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में मुख्य रूप से इन कानूनी बिंदुओं को उठाया गया:
- RTI कानून की धारा 24(4) का उल्लंघन: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24(4) स्पष्ट रूप से कहती है कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों या मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों में जानकारी को छुपाया नहीं जा सकता।
- पारदर्शिता का हनन: विजिलेंस जैसी मुख्य भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसी को आरटीआई के दायरे से बाहर रखना प्रदेश में पारदर्शिता और जवाबदेही को खत्म करने जैसा है।
विजिलेंस को RTI से बाहर करने पर सरकार का तर्क
राज्य सरकार ने विजिलेंस ब्यूरो को आरटीआई के दायरे से बाहर रखने के पीछे जांच की गोपनीयता का हवाला दिया था। सरकार का तर्क था कि भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के दौरान कई संवेदनशील और गोपनीय सामग्रियां सामने आती हैं। आरटीआई के जरिए जानकारी बाहर आने से जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।जांच को निष्पक्ष और गोपनीय बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था। हालांकि, हिमाचल हाईकोर्ट ने फिलहाल सरकार के इन तर्कों को स्वीकार न करते हुए अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है। अब 24 जून को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार को कोर्ट के सामने अपना विस्तृत जवाब पेश करना होगा।






