शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के बागवानों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। अब तक फसल बीमा योजना में मुख्य रूप से ओलावृष्टि (Hailstorm) को ही कवर किया जाता था, लेकिन अब बर्फबारी ( Snowfall) से होने वाले नुकसान को भी Crop Insurance Scheme के तहत बीमा के दायरे में लाने की तैयारी है। पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण हिमाचल में मौसम का मिजाज बदला है। पारंपरिक बर्फबारी के समय में बदलाव आने से सेब उत्पादन पर बुरा असर पड़ रहा है, ऐसे में सरकार बर्फबारी से होने वाले नुकसान को फसल बीमा योजना में कवर करने की योजना में शामिल करने जा रही है। बता दें कि इसी माह अचानक हुई बर्फबारी ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की फसल और एंटी-हेलनेट्स को भारी नुकसान पहुंचाया। बर्फ के भार से जालियां टूटने और पौधों को नुकसान होने से बागवानों को बड़ी आर्थिक चपत लगी है।
क्या है सरकार का नया ‘एड-ऑन कवर’ प्रस्ताव?
- किफायती प्रीमियम: वर्तमान में बागवान प्रति पौधा ₹75 का प्रीमियम देते हैं, जिसमें ओलावृष्टि के लिए ₹23 का अतिरिक्त प्रीमियम शामिल है।
व्यापक सुरक्षा: बर्फबारी को ‘एड-ऑन कवर’ के रूप में जोड़कर बागवानों पर बिना किसी बड़े आर्थिक बोझ के उन्हें सुरक्षा कवच प्रदान किया जाएगा।
जोखिम प्रबंधन: इसका उद्देश्य कम लागत में अधिकतम जोखिम को कवर करना है।
हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यव्स्था में सेब का योगदान
- आश्रित परिवार: लगभग 2.5 लाख परिवार सीधे तौर पर बागवानी से जुड़े हैं।
- सालाना उत्पादन: राज्य में हर साल 5 से 7 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है।
- टर्नओवर: सेब उद्योग का राज्य की जीडीपी में ₹5000 करोड़ से अधिक का योगदान है।
“प्रदेश के बागवानों की आर्थिक सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हम बर्फबारी से होने वाले नुकसान को बीमा में शामिल करने के लिए ठोस प्रयास कर रहे हैं।” – जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री









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