एचबी ब्यूरो, शिमला | हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 की नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही चुनावी नियमों ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। राज्य सरकार ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। वहीं, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आशा कार्यकर्ताओं के पक्ष में एक बड़ा अंतरिम आदेश जारी कर उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर दिया है।
ससुर का कब्जा और बहू की अयोग्यता: क्या है नया नियम?
राज्य सरकार की ओर से लागू नए अध्यादेश (Ordinance) ने उन परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं जिनके पास सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा है।
- कठोर प्रावधान: अब यदि किसी परिवार के मुखिया यानी ससुर का सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा पाया जाता है, तो उनकी बहू चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दी जाएगी।
- दायरे का विस्तार: पहले केवल अतिक्रमणकारी की पत्नी को ही चुनाव लड़ने से रोका जाता था, लेकिन अब बहू को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया है।
- राज्यपाल की मंजूरी: इस नए संशोधन को राज्यपाल की स्वीकृति मिल चुकी है और इसे वर्तमान पंचायत चुनावों से ही प्रभावी कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य पंचायतों को अतिक्रमण मुक्त और जवाबदेह बनाना है।

👉 यह भी पढ़ें : HP Panchayat Election 2026: हिमाचल में पंचायत चुनाव के लिए नामांकन आज से शुरू, जानें नियम और जरूरी दस्तावेज
आशा वर्करों को हाईकोर्ट से मिली संजीवनी
दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य की हजारों आशा वर्करों को बड़ी राहत दी है।
- सरकार के आदेश पर रोक: न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सरकार की उस अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें आशा वर्करों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराया गया था।
- संवैधानिक अधिकारों की जीत: आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें ‘पार्ट टाइम वर्कर’ मानकर चुनाव लड़ने से वंचित किया गया था।
- अब भर सकेंगी नामांकन: अदालत के इस आदेश के बाद अब आशा वर्कर उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगी। मामले की अगली सुनवाई अब 1 जून 2026 को होगी।
चुनावी समीकरणों पर असर
इन दो बड़े बदलावों का असर ग्रामीण राजनीति पर साफ दिखने लगा है:
- पारिवारिक विरासत पर चोट: ससुर के कब्जे के कारण बहू की अयोग्यता से कई राजनीतिक परिवारों के उत्तराधिकार की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
- आशा वर्करों की भागीदारी: हाईकोर्ट के फैसले से अब हजारों महिलाएं चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा सकेंगी, जिससे मुकाबला और रोचक होने की उम्मीद है।







2 thoughts on “Himachal Panchayat Election 2026 Rules : सरकारी जमीन पर ससुर का कब्जा तो बहू नहीं लड़ पाएगी चुनाव, आशा वर्करों को राहत”